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नापतोल विभाग के विभागीय अधिकारी निरीक्षक आनंद मोहन वैरावत,कार्यालय से हमेशा नदारद,चेंबर व मोबाइल फोन हमेशा की तरह बंद,कार्यालय संचालन पर उठे सवाल

नापतोल विभाग के विभागीय अधिकारी निरीक्षक आनंद मोहन वैरावत,कार्यालय से हमेशा नदारद,चेंबर व मोबाइल फोन हमेशा की तरह बंद,कार्यालय संचालन पर उठे सवाल

सप्ताह में महज दो दिन और कुछ घंटों के लिए जाते है, फील्ड में अपनी जगह अन्य कर्मचारी को भेजने का आरोप

वरिष्ठ पत्रकार राकेश साहू,धार की कलम से…

धार। नापतोल विभाग में पदस्थ विभागीय अधिकारी निरीक्षक आनंद मोहन वैरावत की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार अधिकारी नियमित रूप से मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहते हैं। आरोप है कि वे सप्ताह में केवल दो दिन और वह भी दो से तीन घंटे के लिए कार्यालय पहुंचते हैं, जबकि अधिकांश समय उनका चेंबर बंद रहता है।

मोबाइल फोन से संचालित हो रहा पूरा कार्यालय 

अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नापतोल विभाग के अधिकारी आनंद मोहन वेरावत फील्ड भ्रमण पर भी नियमित रूप से नहीं जाते हैं। आरोप है कि वे अपने निजी कमरे से ही मोबाइल फोन के माध्यम से पूरे कार्यालय का संचालन करते हैं तथा फील्ड से जुड़े कार्यों के लिए अन्य कर्मचारियों को भेज देते हैं।

लंबे समय से धार जिले में पदस्थापना पर उठे सवाल 

जानकारी के अनुसार आनंद मोहन वैरावत पिछले चार वर्षों से धार जिले में पदस्थ हैं। इससे पहले भी वे आठ से नौ वर्षों तक धार में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस प्रकार उनका कुल कार्यकाल लगभग 12 वर्षों का होने जा रहा है। इसे लेकर चर्चा है कि वे बार-बार अपना तबादला धार जिले में ही करवा लेते हैं। आखिर इतना धार जिले से मोह क्यों है?

कार्यालय में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर भी चर्चा 

सूत्रों का यह भी कहना है कि संबंधित कार्यालय में कई बार बाहरी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे कार्यालयीन कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कार्यकाल की निष्पक्ष जांच की मांग 

आनंद मोहन वेरावत को धार जिले से इतना मोह है कि अपने सेवाकाल का लंबा समय धार जिले में ही व्यतीत किया है। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा विभिन्न स्तरों पर आर्थिक, नियम विरुद्ध अनेक अनियमितताएं की गई हैं। यदि उनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई गंभीर अनियमितताओं और कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग 

स्थानीय लोगों और संबंधित विभाग के जानकारों ने मांग की है कि अधिकारी की मुख्यालय पर उपस्थिति, फील्ड भ्रमण, पदस्थापना अवधि और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

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