मंगलकारी मुहूर्त में मूलनायक प्रभु श्री शान्तिनाथ जी की प्रतिमा प्रतिष्ठित, मंदिर में धर्ममय वातावरण
मंदिर शिखर पर प्रमुख ध्वजा चढ़ी,अनेक तीर्थंकरों,देव-देवियों एवं आचार्य प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा से गूंजा कुक्षी
“प्रभु की प्रतिष्ठा के पश्चात् नगर माँ की कोख (कुक्षी ) की भांति सुरक्षित होगा- प्रतिष्ठाचार्य,हृदय सम्राट श्रीमद नित्य सेन सूरी जी म. सा.
26 जून को होगा समरसता भोज (नगर भोज )
कुक्षी– धर्मधरा, सुरपुरी कुक्षी में आयोजित श्री शान्तिजिन प्रतिष्ठा सह अंजनशलाका महामहोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को शुभ दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस पावन अवसर पर मंदिर जी में मूलनायक भगवान श्री शान्तिनाथ दादा की प्रतिमा विधि-विधान एवं वैदिक-मांगलिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिष्ठित की गई। जैसे ही मूलनायक प्रभु की प्रतिमा प्रतिष्ठित हुई, पूरा परिसर जयघोष, भक्तिरस और धर्ममय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने प्रभु के जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया और भक्ति में लीन हो गए।
इस अवसर पर मंदिर शिखर पर प्रमुख ध्वजा भी विधिपूर्वक प्रतिष्ठाचार्य गच्छाधीपति हृदय सम्राट श्रीमद नित्यसेन सूरी जी महाराज एवं मुनीमण्डल के मन्त्रोंचार एवं विधिकारको द्वारा लाभार्थी परिवारों से चढ़ाई गई। ध्वजारोहण के इस मंगल क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। जैसे ही ध्वजा मंदिर शिखर पर विराजित हुई, श्रद्धालुओं ने “शान्तिनाथ प्रभु की जय” के जयघोषों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ध्वजा चढ़ने के साथ ही पूरे मंदिर परिसर में उल्लास, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार देखने को मिला।
शुभ एवं मंगलकारी विजय मुहूर्त मूलनायक भगवान श्री शान्तिनाथ दादा मंदिर जी में अन्य तीर्थंकर भगवानों, देव-देवियों, गणधरों, गुरुभगवंतों एवं प्राचीन देवली स्वरूपों की भी प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। आचार्य भगवंतों की निश्रा, मंत्रोच्चार, पूजन-विधि और प्रतिष्ठा विधान के बीच सम्पन्न हुए इन धार्मिक आयोजनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से भर दिया। नगर सहित बाहर से पधारे जिनेन्द्र भक्त बड़ी संख्या में इन मंगल विधानों के साक्षी बने और प्रभु की प्रतिमाओं के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते रहे।
मंदिर परिसर में आकर्षक सजावट, धार्मिक अनुष्ठानों की भव्यता, श्रद्धालुओं की भाव-विभोर उपस्थिति और जयघोषों की गूंज ने ऐसा अलौकिक दृश्य उपस्थित किया मानो धर्मनगरी कुक्षी में स्वयं हस्तिनापुर का दिव्य वातावरण साकार हो उठा हो। महोत्सव के इस विशेष दिन ने न केवल कुक्षी नगर, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक स्मृति निर्मित कर दी।
प्रतिष्ठा महोत्सव में निकला भव्य वरघोड़ा, श्रीसंघ के साथ लाभार्थीयों ने किए जिन मंदिरों के दर्शन
कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य ध्वजा, मुख्य प्रतिष्ठा लाभार्थी सहित अन्य सभी ध्वजा एवं प्रतिष्ठा लाभार्थी तथा प्रतिष्ठा पश्चात तोरण लगाने वाले सभी लाभार्थी श्रीसंघ के साथ सामूहिक रूप से गाजे-बाजे के साथ वरघोड़े में शामिल हुए भव्य वरघोड़ा सुबह 8:15 बजे कचहरी चौक से प्रारंभ हुआ जो सम्पूर्ण श्रीसंघ नगर के विभिन्न जिन मंदिरों के दर्शन करते हुए नव निर्मित मंदिर तक पहुंचा।
प्रतिमास्थापन , शिलाओं एवं देवली स्थापना के रहे लाभार्थी
सम्पन्न प्रतिष्ठा महोत्सव में विभिन्न प्रतिमाओं, शिलाओं, देवली, यंत्र एवं मंदिर स्थापनाओं के लिए अनेक परिवार लाभार्थी बने।
मुख्य मंदिर शिखर ध्वजा के लाभार्थी तिलक चंद रूपचंद जी चौधरी परिवार, प्रभु श्री आदेश्वर जी की ध्वजा के लाभार्थी श्री कनक मल जी गणपत लाल जी तातेड परिवार,श्री आदेश्वरजी कूर्म शिला के लाभार्थी मनोहर लाल जी मणिलाल जी पुराणिक परिवार, शिला स्थापन के लाभार्थी सुरेशचंद्र बाबूलालजी जैन (626) परिवार, श्री शांतिनाथजी कूर्म शिला के लाभार्थी मानमलजी डूंगरवाल (बालिस्टर) परिवार, श्री सांवलिया पार्श्वनाथजी कूर्म शिला के लाभार्थी लूणाजी केशरीमलजी परिवार, सिद्ध शिला स्थापना का लाभ रमनलालजी आनंदीलालजी मोदी परिवार, श्री श्रेयांसनाथ भगवान की प्रतिमा भरवाने के लाभार्थी बाबूलाल सौभागमल जैन (626) परिवार, श्री वासुपूज्य भगवान की प्रतिमा के लाभार्थी रमणलालजी परिवार (शुभम एजेंसी), श्री अनंतनाथ भगवान की प्रतिमा के लाभार्थी बाबूलाल सौभागमल जैन (626), श्री धर्मनाथ भगवान की प्रतिमा के लाभार्थी संतोषीलालजी ख्यालीलालजी जैन बोबावत परिवार, श्री अरनाथ भगवान की प्रतिमा के लाभार्थी छगनलालजी खेमचंदजी पुराणिक परिवार, श्री नमिनाथ भगवान की प्रतिमा के लाभार्थी बाबूलाल सौभागमल जैन (626) परिवार, रहे.।
इसी श्रृंखला में श्री चक्रायुधजी की प्रतिमा के लाभार्थी महेश कुमार जुहारमलजी जैन परिवार, श्री गौतमस्वामीजी की प्रतिमा के लाभार्थी हंसराजजी प्रेमचंदजी, श्री सुधर्मास्वामीजी की प्रतिमा के लाभार्थी सागरमल समरथमलजी टाकीज वाला परिवार, श्री मोहनविजयजी की प्रतिमा के लाभार्थी तिलकचंदजी रुपचंदजी चौधरी परिवार, श्री जयंतसेनसूरिजी की प्रतिमा के लाभार्थी हंसराजजी प्रेमचंदजी, तथा श्री अंबिका माताजी की प्रतिमा के लाभार्थी सम्पत्तिलालजी (राजसी परिधान), गामा रहे। इसके अतिरिक्त श्री मंगल मूर्ति-1 के लाभार्थी मणिलालजी खेमचंदजी पुराणिक परिवार, मंगल मूर्ति-2 के लाभार्थी राजेंद्रकुमारजी मगनलालजी, तथा मंगल मूर्ति-3 के लाभार्थी रमणलाल मगन लाल जैन परिवार, रहे।
वहीं प्राचीन श्री नेमिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी बाबूलाल सौभागमल जैन (626) परिवार, प्राचीन श्री चन्द्रप्रभु देवली के लाभार्थी संघवी राजेंद्र कुमार कनकचन्द परिवार, श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी धनराजजी नेमीचंदजी जैन (डेहरी वाला) परिवार, श्री मुनिसुव्रतस्वामी प्रभु देवली के लाभार्थी रमेशचंद्रजी मूलचंद्रजी धाड़ीवाल परिवार, श्री आदिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी रखबाजी मिश्रीलालजी जैन (घंटाघर वाला ) परिवार, श्री अजितनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी हंसराजजी प्रेमचंदजी, तथा श्री संभवनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी भंवरलालजी उकावत परिवार, रहे। इसी क्रम में श्री अभिनंदन प्रभु देवली के लाभार्थी प्रियंकेश संतोषीलालजी परिवार, श्री सुमतिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन महिला परिषद शाखा-कुक्षी, श्री पद्मप्रभु देवली के लाभार्थी रमेशचंद्रजी चौधरी परिवार, श्री सुपार्श्वनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी सुरेशचंद्र बाबूलालजी जैन (626) परिवार,
श्री चन्द्रप्रभु देवली के लाभार्थी अमोलकचंदजी बावसी परिवार
श्री सुविधिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी नाथुलालजी केशरीमलजी जैन परिवार, तथा श्री शीतलनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी कांतिलालजी बाबूलालजी (626) रहे। इसी प्रकार श्री श्रेयांशनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी श्री पार्श्वनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट, श्री तालनपुर तीर्थ, श्री वासुपूज्य प्रभु देवली के लाभार्थी रमणलाल मगनलाल जैन परिवार, श्री विमलनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी संघवी परिवार (कुक्षी वाले), इंदौर, श्री अनंतनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी बाबूलाल सौभागमलजी जैन (626) परिवार, श्री धर्मनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी श्री धनराज ख्याली लाल बोबावत परिवार, श्री शांतिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी तिलकचंद्रजी रुपचंद्रजी चौधरी, श्री कुंथुनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी अशोककुमार गेंदालालजी जैन परिवार, श्री अरनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी ताराचंद्रजी बावसी परिवार, श्री मल्लिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी हीराचंदजी सौभागचंदजी जैन परिवार, श्री मुनिसुव्रत प्रभु देवली के लाभार्थी कनकचंदजी सुंदरलालजी जैन (डालडा परिवार), श्री नमिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी स्व. शांतिलालजी-स्व. विमलाबाई की स्मृति में पार्श्वनाथ ज्वेलर्स, इंदौर, श्री नेमिनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी रत्नराज स्टील परिवार, श्री पार्श्वनाथ प्रभु देवली के लाभार्थी स्व. तिलकचंदजी रूपचंद जी चौधरी परिवार, श्री महावीरस्वामी प्रभु देवली के लाभार्थी नगदी वस्त्र भंडार, कुक्षी रहे। इसके अलावा नवपद यंत्र स्थापना के लाभार्थी स्व. तिलोकचंदजी-सम्पतबाई, स्व. सुरेशजी-उषा की स्मृति में डूंगरवाल परिवार,रायण पगलिया स्थापना के लाभार्थी रुपराज वस्त्रालय, मधुकर मंदिर, कुक्षी,
गणधर मंदिर के लाभार्थी दिलीपकुमार राजमलजी जैन सेकेट्री परिवार रहे।
गुरु मंदिर के लाभार्थी संघवी भंवरलालजी भगवानजी-संघवी आनंदीलालजी साहेब, परिवार, कुक्षी, श्री मणिभद्र वीर की मूर्ति स्थापना के लाभार्थी दानमलजी चांदमलजी डूंगरवाल, बालिस्टर परिवार, श्री पद्मावती माता की मूर्ति स्थापना के लाभार्थी संतोषीलालजी छगनलालजी एवं श्रीमती शोभा कोठारी (ओहरा), रम्पी डंपी एकेडमी परिवार, श्री गजलक्ष्मी माता की मूर्ति स्थापना के लाभार्थी डॉ. हिम्मतलाल अमृतलालजी जैन,
प्राचीन श्री अंबाजी माता की मूर्ति स्थापना के लाभार्थी कनकचंदजी सुंदरलालजी जैन डालडा परिवार, श्री सरस्वती माता की मूर्ति स्थापना के लाभार्थी संतोषीलालजी छगनलालजी एवं श्रीमती शोभा कोठारी (ओहरा), रम्पी डंपी एकेडमी परिवार तथा श्री अंबिका माता की मूर्ति स्थापना के लाभार्थी रमणलालजी आनंदीलालजी, मोदी सूटिंग रहे।
25 जून को आचार्य प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा भी बनी आकर्षण का केंद्र। महोत्सव के अंतर्गत 25 जून 2026, गुरुवार को भी प्रतिष्ठा के कई मंगल आयोजन सम्पन्न हुए। गुरुभगवंत साधु एवं साध्वी भगवंतों की निश्रा में प्रातःकालीन समय में विभिन्न मंदिरों में पूज्य आचार्य भगवंतों की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की गई।
प्रातः 6 बजे श्री आदेश्वरजी मंदिर, नयापुरा में पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा. की प्रतिमा की प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई, जिसके लाभार्थी रमेशचंद्रजी मूलचंद्रजी धाड़ीवाल परिवार रहे। इसके पश्चात सुबह 6:30 बजे श्री शान्तिनाथजी मंदिर, नयापुरा में भी पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा. की प्रतिमा की प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई, जिसके लाभार्थी लूणाजी केशरीमलजी परिवार रहे।इसी क्रम में श्री सीमंधर स्वामीजी मंदिर में भी पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा. की प्रतिमा की प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई, जिसके लाभार्थी संतोषीलालजी रूपचंदजी परिवार रहे।
प्रतिष्ठाचार्य गच्छाधीपति ने दिया प्रेरक उद्बोधन
प्रभु श्री शान्तिनाथ जी की प्रतिमा प्रतिष्ठा स्थापन के पश्चात् कहा की प्रभु की प्रतिष्ठा के पश्चात कुक्षी नगर उसी भाति सुरक्षित हो जायेगा जैसे माँ की कोख में एक शिशु सुरक्षित होता है ये मंगल कारी प्रतिष्ठा कुक्षी का आध्यात्मिक प्रभाव को ओर मजबूत ओर कुक्षी की कीर्ति में अभिवृद्धि करेगा नगर की सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता को ओर प्रभावशाली बनाएगा. ऐसे सौभाग्यपूर्ण और पुण्यदायी क्षण अलौकिक और भव्य दृश्य विरले ही देखने को मिलते है। धर्मसभा के दौरान कुक्षी विधायक हनी बघेल एवं साथियो ने आचार्य श्री के वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सम्मान ओर बहुमान
सभा में प्रतिष्ठाचार्य गच्छाधीपति आचार्य श्री नित्यसेन सूरी जी को प्रतिष्ठा के पश्चात् कांबली वोहराने का लाभ जैन श्री संघ कुक्षी ने लिया। आयोजित समारोह में श्री जिनशांति मंदिर के अनुपम शिल्पकार श्री अशोक भाई सोमपुरा एवं साथियो का बहुमान किया गया आयोजित सभा में जैन श्री संघ अध्यक्ष श्री मनोहर लाल जी पौराणिक ने पूज्य आचार्य श्री के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा की बहुप्रतिक्षित प्रभु श्री जिनशांति मंदिर के निर्माण के बाद प्रतिष्ठा में पूज्य आचार्य श्री का मार्गदर्शन, आशीर्वाद ओर कृपापूर्ण निश्रा के लिए पूज्य आचार्य श्री नित्यसेन सूरी जी एवं मुनि मण्डल, साध्वी मण्डल का कुक्षी जैन श्री संघ सदैव कृतज्ञ रहेगा।
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