सैलरी घोटालाः तत्कालीन बीईओ को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने कहा-आपने स्वयं व परिजन के खातों में भुगतान किया, FIR किया जाना उचित

जांच के बाद हुई थी एफआईआर, विरोध में पूर्व बीईओ गया था हाईकोर्ट, गिरफ्तारी का रास्ता साफ हुआ
गंगाराम ने विभाग को परेशान करने के लिए सीएम हेल्पलाइन पर 15 शिकायतें दर्ज कराई है। – मनीष सेन,बीईओ,भांडेर मप्र
भांडेर में हुए करोड़ों के सैलरी घोटाले को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकल पीठ ने सरकारी धन की हेराफेरी करने वाले कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। न्यायालय ने साफ किया है कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में पुलिस जांच (FIR) को रोकना कानूनन सही नहीं है। इसी के साथ भांडेर में पदस्थ तत्कालीन बीईओ गंगाराम जाटव और बाबू महेंद्र शर्मा की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। दोनों पर भांडेर थाने में दो साल पहले अतिथि शिक्षकों की राशि के गबन की एफआईआर हुई थी।

बता दें कि गंगाराम जाटव ने भांडेर बीईओ रहते अपने परिवार के सदस्यों के निजी खातों में और लिपिक महेंद्र शर्मा की बेटी नेहा शर्मा को फर्जी अतिथि शिक्षक बताकर 2 करोड़ 35 लाख 89 हजार रु. से अधिक राशि ट्रांसफर कर थी। भांडेर में जब यह सैलरी घोटाला हुआ, तब दतिया में डीईओ यूएन मिश्रा थे। मिश्रा ने भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई।
मामला भोपाल में आईएफएमएस पोर्टल के जरिए पकड़ में आया। इसके बाद भोपाल से ही 907 बैंक खातों को संदेहास्पद मानते हुए जांच के लिए दतिया भेजा गया। कोष एवं लेखा अधिकारी की टीम ने जांच में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद गंगाराम जाटव को बीईओ पद से हटाकर खिरिया आलम का प्राचार्य बना दिया गया। वहीं बीईओ मनीष सेन ने गंगाराम जाटव और लिपिक महेंद्र शर्मा पर भांडेर थाने में एफआईआर कराई।
हाईकोर्ट ने कहा- FIR दर्ज करना पूरी तरह कानूनी है
भांडेर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद तत्कालीन बीईओ गंगाराम जाटव ने हाईकोर्ट की शरण ली। उन्होंने याचिका लगाकर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट से उसे राहत मिलने के बजाय मुसीबत और बढ़ गई। हाईकोर्ट ने गंगाराम जाटव और महेंद्र शर्मा की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब विस्तृत जांच में कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हों, तो एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह कानूनी है। इसमें अनिवार्य रूप से नियम 14 के तहत विभागीय जांच पूरी होने तक रुकने की कोई बाध्यता नहीं है।
जल्द ठोस निष्कर्ष तक पहुंचाने के निर्देश
अदालत ने दतिया कलेक्टर और संबंधित जांच एजेंसी को निर्देश दिया है कि घोटाले की जांच में तेजी लाएं। इसे जल्द से जल्द किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचाएं। इसी के साथ पूर्व में दिया गया कोई भी अंतरिम राहत या सुरक्षा संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने मानवीय आधार पर निर्देश दिया है कि बैंक खाते फ्रीज होने की स्थिति में भी याचिकाकर्ता को उसके जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक न्यूनतम राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
15 शिकायतें दर्ज कराई हैं: गंगाराम जाटव जब बीईओ थे, तब से अब तक का कोई रिकॉर्ड उन्होंने नहीं दिया। इस संबंध में वरिष्ठ कार्यालय को भी अवगत कराया गया। हमने गंगाराम पर एफआईआर दर्ज कराई थी। किंतु गंगाराम और महेंद्र शर्मा हाईकोर्ट में गए। उन्होंने स्टे ले लिया। न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने एफआईआर को सही माना। अब आगे की कार्रवाई पुलिस को करना है। गंगाराम ने विभाग को परेशान करने के लिए सीएम हेल्पलाइन पर 15 शिकायतें दर्ज कराई है। – मनीष सेन,बीईओ,भांडेर मप्र।
इसी तरह का मामला धार जिले के डही खंड शिक्षा कार्यालय में भी हुआ है। जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी और बाबुओं ने आपसी मिलीभगत से अपने चहेतों के बैंक खातों में शासन की राशि ट्रांसफर कर गबन किया है। जिसकी शिकायत तत्कालीन कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को जनसुनवाई में मय प्रमाण की गई किंतु अभी तक भ्रष्टाचार में लिप्त दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। महीनों से केवल आश्वासन दिया जा रहा है। जो संदेह उत्पन्न करता है।
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