मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ नगर पालिका के कांग्रेस अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक को अयोग्य घोषित करते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया है। साथ ही उन्हें पांच साल के लिए किसी भी चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुए सचिव
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव शीलेंद्र सिंह ने 26 फरवरी को नगर पालिका टीकमगढ़ के अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक को 9 बिंदुओं पर कारण बताओं नोटिस जारी किया था। अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक द्वारा इसके लिए पहले हाईकोर्ट की शरण ली गई थी और वहां से राहत न मिलने पर उन्हें जवाब प्रस्तुत किया था। जवाब से संतुष्ट न होते हुए सचिव शीलेंद्र सिंह ने उन्हें लापरवाहियों एवं नपा को हुई आर्थिक क्षति के लिए दोषी पाते हुए पद से पृथक करने का आदेश जारी किया है।

भाजपा में खुशी, कांग्रेस रणनीति बनाने में जुटी
नपाध्यक्ष के पद से पृथक होने पर नपा के विपक्षी दल भाजपा में जहां उत्साह देखा जा रहा है तो कांग्रेस आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। वहीं नपाध्यक्ष गफ्फार ने इसे राजनीति से प्रेरित आदेश बताया है। उनका कहना था कि भाजपा कांग्रेस के अध्यक्ष को सहन नहीं कर पा रही थी। वह आगे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
9 गंभीर अनियमितताओं को लेकर जारी हुआ था नोटिस
टीकमगढ़ नगर पालिका में हुई 9 गंभीर अनियमितताओं के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव शीलेंद्र सिंह ने अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक को फरवरी में नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया था कि इन अनियमितताओं के चलते आपका पद पर बना रहना लोक हित एवं परिषद हित में नहीं है। ऐसे में उन्होंने अध्यक्ष से 15 दिन में जवाब देने और जवाब न देने पर एक पक्षीय कार्रवाई करने की बात कही गई थी।
इन 9 अनियमितताओं का था नोटिस में जिक्र
मां कर्माबाई मार्केट की आवंटित की गई दुकान क्रमांक 8 एवं 9 को नियम विरूद्ध बताते हुए इसमें निविदा की शर्तों का पालन न करने, प्रीमियम की राशि नियमानुसार जमा न कराने, प्रीमियम निर्धारित करने में लापरवाही कर आरक्षित मूल्य का उचित निर्धारण न करते हुए परिषद को 18.89 लाख रुपए की क्षति बताई है।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्ति पर शासन स्तर से प्रतिबंध होने के बाद भी निकाय की सीमावृद्धि को देखते हुए पीआईसी की बैठक प्रस्ताव पारित कर 10 कर्मचारियों की कलेक्ट्रेट दर पर 89 दिनों के लिए नियुक्ति की गई। इसमें परिषद को 1.92 लाख रुपए की क्षति पहुंचाई गई।
परिषद की राजस्व शाखा में कर्मचारियों की कमी बताते हुए पीआईसी की पुष्टी की प्रत्याशा में 10 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को रखा गया। इसके लिए भी 1.92 लाख का भुगतान किया गया।
पुरानी टेहरी में निर्मित की गई संजीवनी क्लीनिक को डूब क्षेत्र में बनाया गया। इसकी प्लेंथ को ऊपर न करते हुए नीचे बनाया गया और एप्रोच सड़क का भी निर्माण नहीं किया गया।
वार्डों में पाइप लाइन के विस्तार के लिए 110 एमएम व्यास की जगह जैम पोर्टल पर 100 एमएम के पाइप की मांग करने, 5 बिडर में से 3 को बिना कारण अमान्य करने, एसओआर दर पर 4.64 लाख रुपए भुगतान की अनुशंसा करने की लापरवाही की गई है।
साथ ही खुली निविदा होने पर निकाय को 30 से 40 प्रतिशत का लाभहोने की बात कही गई। साथ ही एक दिन में ही देयक को निराकृत कर 8.99 लाख रुपए का भुगतान करने की लापरवाही बताई है।
70 वाट की 450 एलईडी स्ट्रीट लाइट जैम पोर्टल से क्रय करने के निर्देश दिए। एसओआर दर पर प्राक्कलन नस्ती न होने, तकनीकी विशेषताएं एवं कंपनी का उल्लेख न होने, बिड 10 दिन में खोल कर निरस्त करने, दोबार निविदा लगाकर 9 दिन में प्रक्रिया पूरी कर एक दिन में ही वित्तीय स्वीकृति अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की गई और निकाय को 10 लाख की क्षति पहुंचाई गई।
एलम क्रय करने में भी नियमों को ध्यान में रखते हुए निविदा जारी कर 9 से 10 लाख रुपए की क्षति पहुंचाई गई।
इसी प्रकार से 90 वाट की एलईडी में भी नियम विरुद्ध काम कर निकाय को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया है।

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