बसंत पंचमी पर सांदीपनि विद्यालय और कन्या उमावि में सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी के अवसर पर संस्था सांदीपनि विद्यालय और कन्या उमावि डही में प्राचार्य श्री अरुण कुशवाह ने मा सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। प्राचार्य श्री कुशवाह ने माता सरस्वती के पौराणिक महत्तव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माँ सरस्वती के भगवान ब्रम्हा के द्वारा उत्पत्ति होने से सृष्टि में उल्लास का वातावरण उत्पन्न हुआ। माता सरस्वती ज्ञान, विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की अधिष्ठात्री देवी है। बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शरुआत होती है और पेड़ों में नए पत्तो का आगमन प्रारंभ होता है।बसंत ऋतु आशा, सृजन और सकारात्मकता की प्रतीक है।

माता सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती है जो की पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक है। पीले वस्त्र धारण करना ऊर्जा, प्रसन्नता,ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने कहा बसंत ऋतु केवल पर्व नही बल्कि एक जीवन दर्शन है जो यह सिखाती है कि जीवन मव सृजन ,सौंदर्य और संतुलन आवश्यक है।सभी को सक्स्रात्मकता के साथ अपना लक्ष्य निर्धारित कर जीवन जीना चाहिये। इसके साथ ही संस्था के शिक्षकों श्री चतर सिंह मंडलोई, सचिन इश्के ,विश्राम सिंह डोडवे, राजाराम सस्तिया शर्मिला भिड़े उपासना गुप्ता, मौसमी बालेश्वर स्नेहा बघेल चांदनी मालवीय, संगीता रावत, संगीत। डोडवे, प्रकाश डोडवे, नवल सिंह चमेलका कुंतीलाल डामरे आदि सभी शिक्षकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर पूजा अर्चना की कार्यक्रम का संचालन श्री मति भिड़े और सरस्वती वंदना उपासना गुप्ता ने की।
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