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डही क्षेत्र में गणगौर महोत्सव की धूम,भक्ति श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास का संगम

डही क्षेत्र में गणगौर महोत्सव की धूम,भक्ति श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास का संगम

डही निमाड़ के प्रसिद्ध लोक पर्व गणगौर महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। डही नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों धरमराय, पड़ियाल, बड़वानिया, बड़दा आदि गांवों में गणगौर पर्व उल्लास पारंपरिक श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। नगर के सभी समाज सकल पंच समिति के नेतृत्व में समाज की बालिका एवं महिलाओं द्वारा प्रतिदिन शाम को थाना परिसर से आकर्षक फूलपाती का चल समारोह निकाला जा रहा है। पर्व के अंतर्गत बालिकाओ और महिलाओ द्वारा पूरी श्रद्धाभक्ति व उत्साह से फूल पांतिया श्रंगारित कर नगर के कचहरी चौक में लाई जा रही है। इसके बाद ढोल और ताशे की मंगल ध्वनि के बीच शोभायात्रा के रूप में ये पातियाँ नगर के कचहरी में से अपने अपने घरो तक लाई जाती हैं इस दौरान सिर पर कलश धारण किए हुए बालिकाएं जब श्रद्धा भाव से नगर भ्रमण करती हैं तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

पर्व की मान्यता :— गण (शिव) तथा गौर (पार्वती) के इस पर्व में कुंवारी लड़कियां मनपसंद वर पाने की कामना करती है। वही विवाहित महिलाएं चेत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती है। कपिल दिक्षित पंडित ने बताया कि समय के साथ गणगौर पर्व का उत्साह बढ़ता जा रहा है। 31 मार्च सोमवार की शाम को बड़ी फूलपाती सजाकर बालिकाए व महिलाएं बड़ी संख्या में निकलेगी। फूल पाती 7 दिन तक निकालते हैं,उसके बाद गणगौर माता के रथ के साथ तीन दिवसीय आयोजन मानते हैं अबकी बार तीसरे दिन बुधवार होने से माता की बिदाई चौथे दिन यानी गुरूवार को होगी। 

शिव और गोरी की आराधना का मंगल उत्सव 

पर्व की मान्यता है कि जो कुंवारी कन्या गणगौर व्रत करती है उन्हें मनपसंद जीवनसाथी का वरदान प्राप्त होता है ईश्वर गौर यानी शिव पार्वती की पूजा का यह पावन पर्व आपसी स्नेह और एक दूसरे के साथ की कामना से जुड़ा हुआ है इसे शिव ओर गौरी की आराधना का मंगल उत्सव भी कहा जाता है वास्तव में गणगौर पूजन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का दिन माना जाता है। खासकर सुहागिन महिलाएं सजधज कर आकर्षक श्रंगार व भक्तिपूर्वक माता की उपासना करती है वहीं पुरुष वर्ग आस्था,उत्साह और उमंग के साथ इस पर्व को धूमधाम से मानते है। गणगौर की पूजा में गाए जाने वाले लोकगीत झालरिया इस अनूठे पर्व की आत्मा है। गणगौर पर्व के अंतर्गत रात्रि के समय भी विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं श्रद्धालु महिलाओ द्वारा माता की बाड़ी के साथ ही नगर व मोहल्लों के घरों में एकत्र होकर झालरिये गीत गाए जा रहे है इन गीतों के माध्यम से माता गौरी और भगवान शंकर की महिमा का गुणगान किया जा रहा है जिसके पश्चात विभिन्न प्रकार की प्रसादी जिनमे धानी,पतासे, बेर की प्रसादी श्रद्धालुओं के बीच वितरित की जा रही है। यह पर्व सौभाग्य,समृद्धि और मंगल कामना का प्रतीक माना जाता है।सम्पूर्ण आयोजन सकल समाज सकल पंच समिति व वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन मे होता है।

 

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